काला धागा पहनने के फायदे डोरा बनाने का मंत्र और विधि

 पहले मौली या पश्च वर्णी डोरे को बटकर एक पक्का लम्बा डोरा बनाए। फिर बालक के सिर से पैर के अंगुष्ठ तक की नाप का डोरा ले । इस डोरे को बटकर इस प्रकार बनाए कि यह बालक के गले में पहनने योग्य रहे। फिर ७ बार मन्त्र गाँठ बीचो-बीच दे । पुनः उसके आस-पास तीन तीन गाँठ एक एक बार मन्त्र पढ़कर दे । कुल ७ गाँठें होंगी और मन्त्र-संख्या १३ होगी । बाद में ७ बार और मन्त्र पढ़कर, लोबान की धूनी देकर डोरे को बच्चे के गले में पहनाए। बच्चे के माता-पिता द्वारा बच्चों को मिठाई बँटवाए ।

विशेष – बच्चा यदि खतरनाक रोग से पीड़ित हो, तो दवा के साथ-साथ प्रयोग करे । लाभ होगा ।

विधि : उक्त मन्त्र की सिद्धि अपने घर, चौराहे, पीर की दर- गाह या सन्त की समाधि के पास बैठकर करनी चाहिए। जहाँ बैठना हो, वहाँ भूमि को शुद्ध कर बैठना चाहिए। बैठनेवाले स्थान को सुगन्ध-मय रखना चाहिए। पश्चिम की ओर मुख रखना चाहिए। यदि हो सके, तो 'लोबान' की धूनी करनी चाहिए। 'पर्व' या 'ग्रहण- काल' में उक्त मन्त्र का १००८ जप करना चाहिए तथा नित्य मन्त्र- सिद्धि हेतु पवित्र किए हुए स्थान पर १० माला जप करना चाहिए। इस तरह जप करने से मन्त्र की सिद्धि होती है। फिर रोग से पीड़ित, बाधा ग्रस्त, निर्बल बालक को लेकर जब उसके माता-पिता आएं, तब उनको गण्डा बनाकर दे। गण्डा कैसे बनाए, इसकी विधि इस प्रकार है-

मंत्र...Read more


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