बिक्री बढ़ाने के लिए द्वादशाक्षर महालक्ष्मी मंत्र

 जिसके जीवन में व्यापारिक बाधाएं आ रही हो या प्रयत्न करने पर भी व्यापार में उन्नति नहीं हो रही हो या उसकी बिक्री नहीं बढ रही हो अथवा व्यापार में किसी प्रकार की अड़चन आ रही हो, तो उसे इस मंत्र का प्रयोग या अनुष्ठान अवश्य करना चाहिए। यह मंत्र अनुभूत है और कई व्यापारियों ने इसका लाभ उठाया है ।

इसमें दो वस्तुओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। एक तो यह है कि यह प्रयोग 32 दिन या 60 दिन में पूरा होना चाहिए तथा इसमें सवा लाख मन्त्र का जप करना चाहिए, जितने दिन का प्रयोग हो, उतने दिन में यह मन्त्र जप सम्पन्न होना चाहिए। मन्त्र जप पूरा होने पर साधक को दस हजार घी की प्राहुतियां इसी मन्त्र से दे देनी चाहिए और यदि सम्भव न हो तो मात्र दस हजार मन्त्र जप और कर लेना चाहिये ।

यह प्रयोग स्वरर्णाकर्षरण गुटिका पर ही सम्पन्न होता है, अतः साधना करने से पूर्व ही इस गुटिका को प्राप्त कर लेना चाहिए। यह गुटिका काले रंग की होती है और सूर्य के सामने रखकर यदि इसे देखा जाय तो इसमें से काले रंग के अलावा अन्य रंग की झांई दिखाई देती है ।

यह स्वर्णाकर्षण गुटिका मन्त्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त होनी चाहिये और मन्त्र प्रयोग करने से पूर्व इसे स्थापित कर देना चाहिए। स्थापित कर देने के लिये किसी विशेष विधि विधान की आवश्यकता नहीं है, केवल चांदी की थाली या चांदी की कटोरी में अथवा किसी अन्य धातु की थाली में चावल की ढेरी बनाकर उस पर इस गुटिका को रखकर इस मन्त्र का जप करना चाहिए ।

जप करते समय सामने शुद्ध घी का दीपक और अगरबत्ती जला लेनी चाहिए और यह मन्त्र जप नित्य इस गुटिका के सामने ही करना चाहिए ।

जब मन्त्र जप पूरा हो जाय तो इस गुटिका को अपनी दुकान में स्थापित कर लेना चाहिए या जहां पर रुपये पैसे रखते हो वहां पर इस गुटिका को रख 

देना चाहिए, इससे उसके जीवन में व्यापार वृद्धि तथा प्रार्थिक उन्नति स्वतः ही होने लगती है ।

यह प्रयोग पुरुष या स्त्री कोई भी कर सकता है, इसमें विशेष विधि- विधान की आवश्यकता नहीं है।

साधक को प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण कर पूर्व की तरफ मुंह कर सामने स्वर्णाकर्षण गुटिका रखकर अगरबत्ती व दीपक लगाकर इस मन्त्र का प्रयोग प्रारम्भ कर देना चाहिए। प्रासन किसी भी प्रकार का हो सकता है, यदि इस प्रयोग में कमल गट्टे की माला का प्रयोग किया जाय तो ज्यादा अनुकूल रहता है ।

मेरे अनुभव में यह भी आया है कि यदि कोई साधक सवा लाख मन्त्र जप न कर सके और यदि वह एक दिन में श्रर्थात् मात्र २४ घन्टे में दस हजार मंत्र जप कर लेता है, तब भी यह गुटिका सिद्ध हो जाती है और पूरा अनुष्ठान करने की जरूरत नहीं होती, दस हजार का तात्पर्य सौ मालाएं फेरने से है ।

इसमें बीच में साधक तीन बार विश्राम ले सकता है, पहली बार 35 मालाएं पूरी करने के बाद दूसरी बार 60 मालाएं तथा तीसरी बार 81 मालाएं पूरी करने के बाद आाधे घण्टे का विश्राम ले सकता है, या अपने आआसन से उठकर इधर-उधर कुछ समय के लिए घूम सकता है ।

मन्त्र : ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौं जगत्प्रसून्यै नमः

यह मंत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण है, और इस मंत्र का प्रयोग उन व्यापारियों को अवश्य करना चाहिए जो कि अपने जीवन में प्रयत्न करने पर भी सफलता प्राप्त नहीं कर पा रहे है । मेरी राय में जो लम्बा अनुष्ठान नहीं कर सकता हो, उसे चाहिए कि वह छोटा ग्रनुष्ठान सम्पन्न कर ले, और एक दिन में ही द हजार मंत्र जप सम्पन्न कर स्वर्णाकर्षण गुटिका को सिद्ध कर ले जिससे कि उसके जीवन में किसी प्रकार का कोई प्रभाव न रहे।

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